तोक्यो ओलंपिक में झारखंड का मान बढ़ाएंगी दो बेटियां

Super Admin - 7/23/2021 10:45:09 PM -

तोक्यो ओलंपिक में झारखंड का मान बढ़ाएंगी दो बेटियां
दो दिग्गज ओलंपियनों को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है

रांची:- ओलंपिक्स का जिक्र हो और सिमडेगा का नाम न आए ऐसा हो नहीं सकता. पहले भी ओलंपिक्स में सिमडेगा के सपूतों ने स्वर्ण और कास्य पदक हासिल कर विदेशी धरती पर तिरंगे का मान बढाया था. इस बार टोक्यो ओलंपिक्स में सिमडेगा की बेटी हॉकी स्टार सलीमा फिर से गोल्ड के लिए अपनी जौहर दिखा भारत का मान विश्व पटल पर ऊंचा करने के लिए तैयार है.
सिमडेगा और ओलंपिक्स का इतिहास
सिमडेगा की माटी जिसके रग रग में खेल और हॉकी बसता है और बात खेल के सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगिता ओलंपिक्स की हो तो सिमडेगा का नाम यहां भी स्वर्ण अक्षरों पर इंगित है. 1972 के म्यूनिख ओलंपिक्स में सिमडेगा के सपूत माइकल किंडों ने हॉकी में जलवा बिखेरा था. इसके बाद 1980 के मास्को ओलंपिक्स में सिमडेगा के लाल सिलबानुस डुंगडुंग ने हॉकी के जौहर दिखाए थे. सिमडेगा के इन दो सपूतों के बाद अब सिमडेगा की ओलंपिक गर्ल अब टोक्यो ओलंपिक में भी सिमडेगा की धाक जमाने को तैयार है. जिले के दो दिग्गज ओलंपियनों को राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से नवाजा गया. माइकल किंडो ने जहां अर्जुन अवार्ड तो सिल्बानुस डुंगडुंग ने मेजर ध्यानचंद अवार्ड जीतकर जिले का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करा दिया. जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरित होती रहेंगी.
सिमडेगा से क्यों है इतनी उम्मीदें?
गौरतलब है कि माइकल किंडो, सिल्बानुस डुंगडुंग के बाद जिले की हॉकी स्टार सलीमा टेटे ओलंपिक गर्ल के रूप में टोक्यो ओलंपिक में अपनी हॉकी स्टिक से कमाल दिखाएगी. भारतीय महिला हॉकी टीम में चयनित होकर सलीमा ने साबित किया है कि सिमडेगा में प्रतिभाएं अभी भी विद्यमान हैं. बस उसे तराशने व निखारने की जरूरत है. बता दें सिमडेगा जिला शुरू से हीं खिलाड़ियों का खान रहा है. जिसने दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय और सैंकड़ों राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी समेत 3 ओलंपियन दिए हैं. सबसे पहले माइकल किंडो का चयन 1972 में म्यूनिख ओलंपिक के लिए हुआ था. जिसमें भारतीय टीम ने जर्मनी के म्यूनिख में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक प्राप्त किया था. माइकल किंडो 1975 में विश्वकप में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारतीय टीम के सदस्य भी रहे थे. इसके बाद 1980 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम में जिले के सिल्बानुस डुंगडुंग का चयन मास्को ओलंपिक के लिए हुआ था. तब भारतीय टीम ने जोरदार प्रदर्शन कर गोल्ड पर कब्जा जमाया था. उसके बाद लगभग 40 सालों के बाद सलीमा टेटे का चयन भारतीय महिला हॉकी टीम में टोक्यो ओलंपिक के लिए हुआ है, इसलिए सबकी नजरें टोक्यो ओलंपिक पर टीकी है. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भारतीय महिला टीम इस बार भी ओलंपिक में स्वर्ण पदक लेकर ही लौटेगी.
सारे ओलंपियन गरीब परिवार से, सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने बताया कि जिले के खिलाड़ियों में खेल के प्रति जुनून देखने लायक होता है. सुविधाएं बढ़ेंगे तो जिले से और भी ओलंपियन निकलेंगे. जिले में तीनों ओलंपियन किसान व गरीब परिवार से निकले हैं. माइकल किंडो मूल रूप से कुरडेग प्रखंड के बैघमा के रहने वाले थे. उनके माता-पिता पतरसिया किंडो और पास्कल किंडो खेतों में काम करते थे. गरीबी के अभाव के बीच भी माइकल किंडों अपनी प्रतिभा के बल पर ओलंपियन बनने तक का सफर किया. पिछले वर्ष 31 दिसंबर को माइकल किंडो का निधन हो गया. इसी तरह केरसई प्रखंड के ठेसूटोली के रहने वाले सिल्बानुस डुंगडुंग के माता-पिता मोनिका डुंगडुंग और मार्कुस डुंगडुग भी किसान थे.सिल्बानुस डुंगडुंग ने भी अभावों के बीच अपनी प्रतिभा के बल पर मास्को ओलंपिक तक पहुंचे, और देश को गोल्ड दिलाने में योगदान दिया. अब ओलंपिक्स गर्ल सलीमा की बात करें तो वो भी किसान परिवार से है.वो बड़कीछापर गांव के किसान सुलक्शन टेट और सुभानी टेटे की बेटी है. खेत-खलिहान से हॉकी की शुरुआत करने वाली सलीमा का चयन टोक्यो ओलंपिक के लिए हुआ है. सलीमा के माता-पिता आज भी खेतों में काम कर रहे हैं.
एक ओलंपिक में झारखण्ड के दो-दो खिलाड़ी पहुंचे
झारखंड के दो महिला हॉकी खिलाड़ी निक्की प्रधान और सलीमा टेटे टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम में चयनित हुई है. ये झारखंड के लिए गौरव का अवसर है. झारखंड में पहला अवसर है जब हॉकी टीम के एक ओलंपिक में झारखण्ड के दो दो खिलाड़ी पंहुचे. ये अपने आप में इतिहास है. ये ऐतिहासिक मौका भी निश्चित रूप से एक स्वर्णमयी इतिहास लिखेगा और टोक्यो ओलंपिक्स में भारत का दबदबा गोल्ड लेकर बनेगा. विदेशी धरती पर भारत मां की शान बढाने और तिरंगे का मान सबसे ऊंचा करने के लिए झारखंड की ये दोनों बेटियां हॉकी स्टीक से ओलंपिक्स फतह की गाथा लिखेगी.

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