झुमरी तिलैया दसलक्षण महापर्व का आज दूसरा दिन 11 सितंबर उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया आज स्टेशन रोड बड़ा जैन मंदिर के मूल वेदी में प्रथम अभिषेक ओर शांति धारा महावीर प्रसाद जैन सेठी,ओर नेमिनाथ भगवान की वेदी में संजय रितेश जैन गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ भगवान का मंगल विहार कर सरस्वती भवन में प्रथम अभिषेक बिजय जैन सेठी नए मंदिर जी मे प्रथम अभिषेक इर शांतिधारा सुगन चंद जैन सेठी को सौभाग्य मिला
इसके पश्च्यात सरस्वती भवन में अरियका 105 सौभाग्य मति माता जी ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि फूलों के समान मन के भाव का होना ही मार्दव धर्म है कोमलता हर जीव को पसंद है अतः मृदुभाषी बने उत्तम मार्दव धर्म पर लोगों को समझाते हुए कहा कि आज मनुष्य अहंकार के कारण ही दुखी है अगर मनुष्य अहंकार ना करे तो उसका जीवन सरलता की ओर बढ़ जाएगा
चित्त में मृदुता और व्यवहार में विनम्रता ही मार्दव धर्म है। यह मान कषाए के अभाव में प्रकट होता है। जाति, कुल, रूप, ज्ञान, तप, वैभव, प्रभुत्व और संपत्ति का गुणगान करना इतराना ही अहंकार है । इस मान कषाए को जीतना ही उत्तम मार्दव धर्म कहलाता है। संध्या में सांस्क्रतिक कार्यक्रम की दीप प्रज्वलित प्रदीप जैन पांड्या, शशि-रीता जैन सेठी,बिनोद अर्हम जैन अजमेरा ने किया और आज की विजेता पिंकी जैन सेठी को पुरुस्कृत किया गया मौके पर जैन समाज के मीडिया प्रभारी नवीन जैन और राजकुमार अजमेरा मौजूद थे।



